एक दिन पर्भात्तै एक हल बड़ लै एक हल बल्लु लै चिम्टो जोत्ताइ झान्नार्या भ्या । बड़ आघा–आघा ठाडो गर्धन गरिबरे खुप सानले भुबाइबरे झान्नार्या, बल्ल बाटाका ड्यालि कन्सिमुण चद्दाचद्दाइ झान्नार्या । बाटमाइ एक मान्स भिटियो रे बड़ुनलाइ सोद्यो “काँ झान पैरैछौ बड़ौ” ? बड़ुनले खुप सानले फुपाट गरिबरे भण्यो “बान जि बान” (बाँजो खण्ण झान्नारिउँ) भणिछ । थोक्कै पाछा बल्लु लै भिटिया रे उइ मान्सले बल्लुन लै सोद्यो “काँ झान्नाछौ बल्लौ ?” भणि । बल्लुन जाणि राख्यो भ्यो बाँजो जोत्ताकि आफत रे तस्सोइ निसुरो होइबरे सद्दिले “बान... जि... बान” भणिछ । आब दिनभर बाँजो जोतिबरे बड़ बिचारा थगिबरे र्याल्लु गद्दा होइग्या । घर फर्कन्या बेला बल्ल आघाआघा फुपाइबरे ठाडो गर्धन गरि उन्ना¥या, बड़ तस्साइ उन मुण्डो गरि निसुरा होइबरे उन्नार्या । उसै मान्सले तन फर्कन्ज्याँ लै धेकिछ रे आँजि सोदिहाल्यो “काँ है आया बल्लौ ?” बल्लुनले फुपाइ बरे ठाडो गर्धन गरि “बान जि बान” भणि हिट्टाइ लाग्या । आब बड़ुन लै सोद्यो “काँ है आया बड़ौ ?” भणि । बड़ बिचारा तस्साइ निसुरा होइबरे सद्दिले भण्यो “बान... जि.. बान.... ।”
.gif)