शुक्रबार, भदौ ५ गते २०८३ || Aug 21, 2026
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कौवा राण्का लइ दुइ ब्या


बुधबार, माघ ५ २०७८
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    कौवा राण्का लइ दुइ ब्या


    एक कौवा रैछ । तइ कौवाका दुइ ब्या भया ।  एकदिन तिनै स्वानि बौस्या चारो खोज्जु गया । दिनभर जङ्ङलमुणि कल्या हस्याल, काफल खायान रे ब्याल्कनिबार घर फर्कनपस्या । कव्वाकि कान्सि स्वानिले मुइ त भौत थगिगयु रे उडि़ नाइसक्को भणिछ रे कौवाले तइ अफना ठुणमुणि चेपिबरे लिउन पस्यो । सौत्तेइ डा भण्णान धेक्या, जेठिले लइ मुइलइ उडि़ नाइसक्को मुइलइ बोकिलैझा भण्यो । बिचारा कौवाले जेठि स्वानिलइ नाङारानले चेपिबरे उड्डु पस्यो आब एक ठुणमुणि, एक नाङरानले सामिबरे उड्डु पस्यो रे बिचमा गाङो पड्या रे  जेठिले सौता मरलि भणि बिच गाङामाइ पुगन्जेइ कौवालाई रिस उठुन्या गरि कौवाराणा लइ दुइ ब्या भण्यो । कौवालाई रिस आइ रे तेरो किग¥या ब पुइ भणु भणि बोलुन्ज्याँ ठुणमुणि चेपि कान्सि स्वानि गङाइन झडि़गइ । उन्जा नङरानले सामु पुइ भणिसुच्यो रे जेठि लइ तसइ गाङाइनि झडि़ ।




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