मंगलबार, असोज ६ गते २०८३ || Sep 22, 2026
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मेरा कोइराला रूख बटा है


मंगलबार, माघ ११ २०७८
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    मेरा कोइराला रूख बटा है


    गड़ाका ड्यालिमाइ जर्म्यो 
    बर्षौ कलिइ रयो 
    न्यारोइ छिरबिर्या कोइरालौ रुख 
    भौउतै ठूलो लै नाइ, भौतै नानो लै नाइ 
    फुलिबरे  , फुलनकि फकुण्णान्न 
    छाड भागि  १ हेद्दामाञि कतिको सुटाइलो 
    भउतइ सुटाइलो, आँखा तरा जसो 
    हिमाल जसो, कि कमाल धर्ति मतारिकि 
    रूपसो खात, हियो तारो 
    सुन्नर सारो, मेरो कोइरालो रूख 
    बासकि मगमग 
    फूलनकि झकमक 
    पुरा बखाण गद्दाकि , 
     शब्दनो अकाल 
    फूल रे कोपानो 
    छाचिमाइ भिट्क्यायो 
    अती स्वादिलो साग 
    दैमाञि हाल्यो राइतो 
    नउँ सुणञ्जाइ डगनले 
    खोलानकि त कुरड़ि छाड रे 
    गाऽड़ बगन्छे, गाड रालकि 
    भनभनाट भौरानकि, मनमनाट मौरानकि 
    मान्सनो गोइरो, फूलनो सोइरो 
    तती मात्तरै काँरु
    सौला दान, दरूवा दान 
    अक्सिजन दान, 
    ओखदा भणार, कतिको उदार 
    कतिको दिलदार, कतिको मालदार 
    साधुवाद हजार 
    मेरा कोइराला रूखलाइ 
    न तोलिन्या त्याग, सपैलाइ तेरि माग 
    सत्प्रतिसत उदार 
    मेरा कोइराला रूखलाइ 
    सलाम छ हजार बार
    ओ मान्सौ ११ ओ अग्वाउ  ११
    अती स्वार्थको पोको, घमण्डको डोको 
    घुसको भोको, कामको थोको 
    सुण पुइ११सुण११
    कान औला जन हाल 
    केइ त सिक्काउँ ,  केइ त लेख्खाउँ 
    केइ त भण्णाउ, केइ त गद्दाउ 
    मेरा कोइराला
    उदार  रूख बठेइ 
    यो समाज,  यो देश, यो संसार 
    भाषा,  साहित्य,  संस्कृति, स्वास्थ्य 
    कि उब्यान्द कि ल्यखा 
    बटा हेरि रयान, तकि रयान 
    मेरो कोइरालो रूख 
    उत्तेइ छ। 
    चडा, मौरा, भमौरा रिटिरयान 
    मेरा कोइराला रूख बटि है।




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