असौजा मैना कन्याकत, सरादका बमुन भण्या त किस्साइ लइ हो रे बामनुनकि खुप दौड़धुप चलिरन्या । एक बामुनले रात्तै उठिबरे नानिधुनि गरिबरे सन्यापुजा गरि कानैनि झोला हालि रे सराद झान पस्यान । उन्ज्याँ बामुनि बोलिन रे ब खानाइ कन्ज्याँ आसला ब ? कि वाइ खाइऔन्या हो ? भण्यो । उन्ज्याँ बामुन बोल्यारे जिजमानुनले खानाइ लइ ञाइ पकाला भणिराखिछ रे तमुन बनाइखाया भण्यो हिट्टाइ लाग्या । प्रभात्तनि गया भया रे न्वालाका तलिथाइ हस्यालकि झेलिका ओप्छा जिजमान्निनलाइ झड़ाफेद्दारिकि धेकिछ ।
बामुन तस्साइ उब मुख फर्काइबरे मथ्थिखाइ पुग्या, जिज्मान्निनले झड़ा फेरिसकि तस्सि उठिन रे धुनिधानि केइनाइ रे तस्सि पानी न सौजेइ फोलो हात समायो रे पानी भरि घर झान पसिन । बामुननुले धेकिहाल्यो रे आब पानी नसौजेइ पानी भरि लेइन रे तनरो लाग्यो खानिसद्दान पिनिसद्दा भणि सुच्यारे सराद सराद ग¥यो रे खानाइ नखाएइ घर आयान ।
बामुन झट्टै घर आया धेकि बामुनिनले भण्यो ब वाइ खाइउनिहुँ भन्थ्या रे कसो हो इति झट्टै ब आया । बामुन बोल्या रे छाड़ झानब्यार जिज्मान्नि झड़ा बैरइ धेक्या रे पानी न सौजेइ आइन रे सद्दा नाइलागि रे नाइ खाया वाँ रे नान चुलोभाणो गरिबरे पानि माज राख, भात पकुनौ रे भणिछ । उन्ज्या बामुनि बोलिन रे ओ असद्दि पुष मैना त हमलइ तसोइ गरन्थ्या रे तुइले त असौजइका मैना लइ नाइधोएइ भणिछ । बामुनिनले तसो भण्यो सुण्न्ज्या बामुन त तस्साइ हाइदासिया रे खानिन पिनी रे तस्साइ घरहइ निकल्या रे हरद्वार झाइ बस्यान
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